५. सबूड़ा का दाव
एक बार ७ वर्ष की छोटी उम्र में बालक त्रिभुवन खंभात में मामा के यहां गया। बाल्यकाल होने से आस-पास के हमउम्र बच्चों के साथ पास के ही चोकसी मोहल्ले में गोटी खेलता था। आगंतुक होने से सभी बच्चे कौतुक से उससे पूछते- बोल सबूड़ा! कितनी गोटियों का दांव लगाकर खेलना है? सबूड़ा कहता है- इसमें पूछना क्या! सौ गोटी का। उसका उत्तर सुनकर सभी आश्चर्यचकित होकर सोचते कि क्या सबूड़ा सब जीत लेगा? और होता भी ऐसा ही। एक ही दांव में सौ गोटियां सबूड़ा के पास आ जातीं। घर और मोहल्ले में प्यारे नाम से प्रसिद्ध सबूड़ा और कोई नहीं त्रिभुवन ही था।