Samkit Dayak Vijay Ramchandra Suri

२३. ऐसा कभी करने नहीं दूं

पूज्यश्री का चातुर्मास अहमदाबाद के कालूपुर ज्ञान मंदिर में था। वहां एक दिन सुबह व्याख्यान के समय से २०-२५ मिनट पहले ६-७ धनवान प्रमुख श्रावक उनके पास आये। उन प्रमुख श्रावकों ने गुरु भगवंत से कहा कि आप जैसे विद्वान व्याख्यान वाचस्पति गुरु भगवंत पिछले २०० वर्षों में नहीं हुए और आगे के १०० वर्षों में होंगे या नहीं इसमें संदेह ही है। अतएव कृपा करके भावी पीढ़ी के हित में अपना व्याख्यान रेकॉर्ड करने देने की सहमति प्रदान करें।

लेकिन पूज्यश्री ने स्पष्ट शब्दों में मना किया और कहा कि ऐसा कभी नहीं होने दूंगा। हमलोगों में प्रेस का दोष जो घुस गया है वह बहुत ही गलत हुआ है, अब हमें नया पाप और नहीं शुरू करना है। सभी संघ अग्रणी चुप हो गये और कोई कुछ बोल नहीं सका।