Samkit Dayak Vijay Ramchandra Suri

१८. ऐसे कपड़े न पहनें

भावनगर संघ में अमरचंद जसराज और कुंवरजी आणंदजी दो श्रद्धालु श्रावक थे। इनमें अमरचंद जसराज अत्यधिक श्रद्धालु और साहेबजी के परम भक्त थे।

इन दोनों श्रावकों का संघ में वर्चस्व था। उनकी सलाह सूचन अनुसार ही संघ की गतिविधियां होती थीं। ये गीतार्थ को पूछे बिना कुछ भी नहीं करते थे।

वि. सं. १९७० में एक बार साहेबजी वहोरने जा रहे थे, उस समय गुरुदेव द्वारा धारण किया हुआ वस्त्र फटा हुआ था। वो फटा हुआ कपड़ा अमरचंदभाई ने देखा और कहा कि साहेब! ऐसा कपड़ा ना पहनें, इससे लोगों में अच्छा नहीं लगता, आप वापस जाकर कपड़ा बदल लें। फिर साहेब से पूछा कि आपको नया कपड़ा वहोराऊं क्या? तब उन्होंने कहा कि मुझे जरूरत नहीं है। बाद में दूसरा कपड़ा ओढ़कर वे गोचरी गये।