२०. होटलों का बहिष्कार
मुनिश्री रामविजयजी के पास दीक्षा लेने वालों की संख्या बढ़ रही थी। इस परिस्थिति में दीक्षा विरोधी वातावरण फैलना स्वाभाविक था। रतनबाई नाम की महिला के पति ने रामविजयजी के पास दीक्षा ली थी, उसके विरोध में जाहिर सभा में महिला ने रामविजयजी के पास से मुझे मेरा पति वापस दो, ऐसी मांगकर उनके कपड़े खींचने का प्रयत्न किया था।
यह मामला कोर्ट तक गया और कोर्ट ने रामविजयजी को निर्दोष घोषित किया। श्री रामविजयजी महाराज को अलग-अलग कारणों से विभिन्न स्थानों पर लगभग ३० बार कोर्ट में बयान देने जाना पड़ा था। परंतु प्रत्येक बार कोर्ट ने पू. महाराजश्री को निर्दोष घोषित किया।
वि.सं. १९७६ का चातुर्मास उन्होंने अहमदाबाद विद्याशाला में किया था तब आजादी पूर्व के दिन थे। चाय का व्यसन लोगों में बढ़ रहा था। उस समय चाय का सख्त विरोध भी हो रहा था। उस जमाने में अहमदाबाद रीची रोड (गांधी मार्ग) पर स्थित दो नामचीन होटलों में पूरे दिन चाय पीने वालों की भीड़ लगी रहती थी। इसमें जैनों की संख्या भी अधिक थी, जो चाय के साथ अभक्ष्य खाते थे। होटल में प्रतिदिन ७० मण दूध का उपयोग होता था।
उस समय रामविजयजी महाराज ने इसके विरोध में आवाज उठायी। जगह-जगह पर उन्होंने प्रवचन के माध्यम से इस बारे में लोगों को समझाया। उनके प्रवचनों का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिससे होटल की ग्राहक संख्या कम हो गयी। फलस्वरूप प्रतिदिन ७० मण दूध के बदले मात्र २-३ मण दूध का ही उपयोग होने लगा। उस समय रामविजयजी महाराज की वाणी का कितना प्रभाव था, इस घटना से साबित होता है।